कुछ खो से गएँ हैं

हिंदी में मेरी पहली रचना है, असुविधा के लिए खेद है | 😀

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कुछ खो से गएँ हैं

सपनो का वोह कतरा कहीं छुट सा गया है

कहते थे सब, इस राह पे चलो

राह अच्छी है ये

उन बुलंदियों को छुआ है

लोगों ने इस राह पे चलते हुए

वाकई अच्छी होगी राह वोह

जाते तोह हैं सभी, आज भी

कम से कम एक ख्वाइश तोह है

उन राहों पे चलने की

वोह राह जो हमने चुनी नहीं

ना भटकने के थे सौकीन

पर वोह राह क्या जो  अनजाना नहीं

जाना था तोह सिर्फ एक मंजिल

राहें तोह खुद बनानी है

चल पड़े उस राह जिसे किसी ने जाना नहीं

कुछ खो से गए है

दिख नहीं रहा अब आगे कहीं

हैं क्या मंजिल आगे कहीं

सपनों का वोह कतरा क्या है यहीं |

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About Barun Jha

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